अहम् से ब्रह्म तक · Part- 02
अहम् से ब्रह्म तक · Part- 02
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| Morning yoga session at 5:45 AM |
सिस्टम Restart और विचारो की शून्यता
शारदा तपोवन, टिहरी गढ़वाल — 46वाँ अद्वैत जागरण शिविर
हम-सुख़न कोई न हो और हम-ज़बाँ कोई न हो।।
- मिर्ज़ा ग़ालिब
शहर से वादियों तक
शारदा तपोवन, टिहरी गढ़वाल की वे शांत और एकांत वादियाँ मेरे भीतर कुछ ऐसा बदलाव कर रही थीं, जिसका अहसास मुझे शुरुआती दो दिनों में ही होने लगा था।शहर की वही चिर-परिचित भागदौड़, काम का अंतहीन बोझ, रोज़मर्रा की डेडलाइंस और दिमाग में चौबीसों घंटे चलने वाली अनगिनत बैकग्राउंड ऐप्स से निकलकर जब मैं अचानक इस शांत वातावरण में पहुँचा , तो शुरुआती 48 घंटों में ही मुझे एक बेहद अजीब लेकिन जादुई अनुभव होने लगा।
द लैपटॉप एनालॉजी — जब चेतना रीबूट होती है
हम सब रोज़मर्रा की ज़िंदगी में तकनीक का इस्तेमाल भरपूर करते हैं। जब हमारा लैपटॉप बहुत सारे भारी सॉफ़्टवेयर और फ़ाइलों के बोझ की वजह से हैंग होने लगता है, उसका प्रोसेसर गर्म हो जाता है ।
तब हम क्या करते हैं????
हम उसे एक बार के लिए पूरी तरह शटडाउन करके रीस्टार्ट करते हैं। यह एक सामान्य तरीका है जो कभी न कभी अपने भी किया होगा।जब वह लैपटॉप दोबारा ऑन होता है, तो वह बिल्कुल फ्रेश होता है, कुछ नए अपडेट्स के साथ, कुछ नए फ़ीचर्स के साथ, और एक नई स्पीड के साथ। ठीक यही अनुभव मुझे उन पहले दो दिनों में हो रहा था।
यह 46वें अद्वैत जागरण शिविर की दिनचर्या कोई साधारण रूटीन नहीं थी — यह एक बेहद अनुशासित और वैदिक थी।
"इस वैदिक शेड्यूल ने दिमाग के सारे शोर को थमा दिया, और मुझे खुद को समझने की एक नई clarity दी।"
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| Official Daily Schedule During Retreat |
एक लेखक का मन: 'द एब्सोल्यूट ब्लैंक'
कलात्मक तौर पर मैं एक लेखक हूँ। मेरे दिमाग में हमेशा कोई न कोई विचार, किसी अधूरी कहानी का कोई मोड़, किसी कविता की अधूरी पंक्ति, किसी नए किरदार का स्केच या कोई नया प्लॉट घूमता ही रहता है। एक लेखक का दिमाग विचारों की एक ऐसी अंतहीन फ़ैक्ट्री है जो सोते-जागते कभी बंद नहीं होती।
लेकिन वहाँ दो-तीन दिन बिताने के बाद, मैंने महसूस किया कि मेरे विचार पूरी तरह शून्य हो चुके हैं।
"I was completely blank."
गुरुमा से संवाद — जब शून्य को उत्तर मिला
इस उलझन को लेकर मैं शिविर में गुरुमा के पास गया। मैंने अपनी इस अजीब मानसिक स्थिति को साफ साफ उनके सामने रखा:
"गुरुमा, मेरे भीतर एक अजीब-सी स्थिति पैदा हो रही है। मुझे पिछले दो दिनों से कोई विचार ही नहीं आ रहे, न अच्छे, न बुरे। मेरा दिमाग पूरी तरह खाली हो गया है। गुरुमा, मेरी यह हालत क्या संकेत देती है?"
मेरी बात सुनकर गुरुमा के चेहरे पर एक बेहद सौम्य और आश्वस्त करने वाली मुस्कान तैर गई। गुरुमा के जवाब से मेरे रिक्त मन को शांति मिली,
गुरुमा का उत्तर मेरे शब्दों मे,
"यह तो बहुत ही अच्छी और सुंदर बात है कि आपके भीतर कोई विचार उत्पन्न नहीं हो रहा। यहाँ आकर आपकी बुद्धि 'अनलर्न' हो रही है। अब तक आपने दुनिया भर का जो कचरा, जो मान्यताएँ, और जो सूचनाएँ अपने भीतर ज्ञान समझकर इकट्ठी कर रखी थीं, आपका यह सिस्टम उसे डिलीट कर रहा है। आप एक 'New Start' पर खड़े हैं।"
अनलर्निंग — नया सीखने से पहले खाली होना
अद्वैत वेदांत का मर्म भी यही है कि हम जो नहीं हैं, पहले उसे छोड़ें — नेति, नेति।
एक लेखक के तौर पर मैं हमेशा 'कुछ नया रचने' या 'कुछ नया सीखने' की होड़ में रहता था। लेकिन अध्यात्म की पहली सीढ़ी कुछ नया जोड़ना नहीं, बल्कि जो व्यर्थ है उसे घटाना है।
मेरा विचार-शून्य होना कोई ब्लॉकेज नहीं था , बल्कि वह मेरे मन की ज़मीन का उपजाऊ होना था, ताकि उस पर शुद्ध विचारो की उपज हो सकें।
हिमालय की उन वादियों में, जब विचारों का कोलाहल थमा, तब जाकर मुझे समझ आया कि असली शांति क्या होती है। जब आपका लैपटॉप रीस्टार्ट होता है, तो उसकी स्क्रीन कुछ पलों के लिए बिल्कुल ब्लैंक होती है । वह कबाड़ साफ कर चुका होता है। मेरी भी वही स्थिति थी।
रीस्टार्ट की यह प्रक्रिया अब पूरी हो चुकी थी, और मैं अपने नए 'अपडेटेड वर्जन' के साथ अद्वैत के इस असीम सागर में और गहरे उतरने के लिए पूरी तरह तैयार था।
"अहम् से ब्रह्म तक" सीरीज़ · Part 02 · अद्वैत वेदांत जागरण
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